दिन 18-20:
सेतु बंधासन और पवनमुक्तासन
अब आप पीठ की मजबूती के लिए सेतु बंधासन (ब्रिज पोज़) और पाचन सुधार के लिए पवनमुक्तासन सीखेंगे।
ये दोनों आसन शरीर के लिए बहुत फायदेमंद हैं। कुल 25 मिनट का अभ्यास।
दिन 18-20 में क्या करेंगे?
पिछले 17 दिनों में आपने कई आसन सीखे। अब हम दो नए आसन जोड़ेंगे – सेतु बंधासन (ब्रिज पोज़) जो पीठ और कूल्हों को मजबूत करता है, और पवनमुक्तासन (वायु मुक्ति मुद्रा) जो पाचन सुधारता है और गैस/कब्ज से राहत देता है।
25 मिनट का दैनिक अभ्यास:
- 2 मिनट: गहरी श्वास (वार्म-अप)
- 3 मिनट: मार्जरीआसन (रीढ़ तैयार)
- 8 मिनट: सेतु बंधासन (3-4 बार)
- 5 मिनट: पवनमुक्तासन (दोनों पैर)
- 4 मिनट: बालासन
- 3 मिनट: शवासन (विश्राम)
इन तीन दिनों का लक्ष्य:
- सेतु बंधासन में पीठ और कूल्हों की मजबूती
- पवनमुक्तासन से पाचन सुधार
- रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाना
- तनाव और गैस से राहत
सेतु बंधासन (Bridge Pose) - सेतु बंधन मुद्रा
सेतु बंधासन एक बेहतरीन आसन है जो पीठ की मांसपेशियों को मजबूत करता है, कूल्हों को खोलता है और थायराइड ग्रंथि को उत्तेजित करता है। यह मानसिक तनाव को कम करने में भी मदद करता है।
सेतु बंधासन कैसे करें?
- पीठ के बल लेट जाएँ (शवासन में)
- घुटनों को मोड़ें, पैर कूल्हों के बराबर चौड़े रखें
- पैर जमीन पर सपाट, एड़ियाँ कूल्हों के पास
- बांहें शरीर के बगल में, हथेलियाँ जमीन पर
- गहरी साँस लें और कूल्हों को धीरे-धीरे ऊपर उठाएँ
- शरीर को घुटनों से कंधों तक सीधा रखें (पुल जैसा आकार)
- कंधों और सिर को जमीन पर रखें
- 15-30 सेकंड रुकें और गहरी साँस लें
- साँस छोड़ते हुए धीरे-धीरे नीचे आएँ
लाभ:
- पीठ की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है
- कूल्हों और छाती को खोलता है
- थायराइड ग्रंथि को उत्तेजित करता है
- पाचन में सुधार करता है
- तनाव और चिंता कम करता है
शुरुआती लोगों के लिए संशोधित तरीका
- कूल्हों के नीचे तकिया या कंबल रखें – आसान होगा
- शुरू में कूल्हों को ज्यादा ऊपर न उठाएँ – जितना आरामदायक हो
- अगर घुटने में तकलीफ है तो घुटनों के नीचे तकिया रखें
- 15 सेकंड से शुरू करें, धीरे-धीरे 30 सेकंड तक बढ़ाएँ
- अगर गर्दन में दर्द हो तो धीरे-धीरे उठें – अचानक नहीं
सावधानियाँ:
- गर्दन में चोट हो तो न करें
- गर्दन को इधर-उधर न घुमाएँ
- कूल्हों को ज्यादा जोर से ऊपर न उठाएँ
- हर्निया या स्लिप डिस्क में सावधानी
- गर्भावस्था में तकिया का सहारा लें
पवनमुक्तासन (Wind Relieving Pose) - वायु मुक्ति मुद्रा
पवनमुक्तासन का नाम ही बता देता है – "पवन" (वायु) को "मुक्त" करने वाला आसन। यह पेट की गैस, कब्ज और पाचन समस्याओं में राहत देता है। साथ ही पीठ और कूल्हों की मांसपेशियों को आराम देता है।
पवनमुक्तासन कैसे करें?
- पीठ के बल लेट जाएँ
- दोनों घुटनों को मोड़ें
- गहरी साँस लेते हुए घुटनों को छाती के पास लाएँ
- हाथों से घुटनों को पकड़ें (या जांघों के पीछे)
- सिर और कंधों को जमीन पर रखें
- गहरी साँस लें, पेट फूलने दें
- साँस छोड़ते हुए घुटनों को और छाती के पास दबाएँ
- 30-60 सेकंड इसी मुद्रा में रहें
- धीरे-धीरे पैर नीचे लाएँ
लाभ:
- पेट की गैस और कब्ज में राहत
- पाचन में सुधार
- पीठ और कूल्हों में आराम
- पेट की मांसपेशियों को टोन करता है
- तनाव कम करता है
शुरुआती लोगों के लिए संशोधित तरीका
- एक-एक पैर से शुरू करें – पहले दाएँ, फिर बाएँ
- अगर घुटनों को छाती तक नहीं ला सकें तो जितना हो सके उतना लाएँ
- हाथों से घुटनों को पकड़ना मुश्किल हो तो जांघों के पीछे से पकड़ें
- सिर के नीचे तकिया रखें
- गर्भावस्था में एक-एक पैर से करें
सावधानियाँ:
- घुटनों में तेज दर्द हो तो न करें
- गर्भावस्था में पेट पर दबाव न डालें
- हाल ही में पेट की सर्जरी हुई हो तो न करें
- हर्निया या अल्सर में सावधानी बरतें
- गर्दन को ज्यादा न झुकाएँ
दिन 18, 19 और 20 का विस्तृत क्रम
दिन 18: सेतु बंधासन का परिचय
- गहरी श्वास (2 मिनट)
- मार्जरीआसन (3 मिनट)
- सेतु बंधासन (8 मिनट) – 3 बार
- पवनमुक्तासन (3 मिनट)
- बालासन (4 मिनट)
- शवासन (3 मिनट)
दिन 19: पवनमुक्तासन पर फोकस
- गहरी श्वास (2 मिनट)
- मार्जरीआसन (3 मिनट)
- सेतु बंधासन (5 मिनट) – 2 बार
- पवनमुक्तासन (6 मिनट) – दोनों पैर
- बालासन (4 मिनट)
- शवासन (3 मिनट)
दिन 20: दोनों का संयोजन
- गहरी श्वास (2 मिनट)
- मार्जरीआसन (3 मिनट)
- सेतु बंधासन (6 मिनट) – 3 बार
- पवनमुक्तासन (5 मिनट)
- बालासन (5 मिनट)
- शवासन (4 मिनट)
दिन 18-20 का पूरा अभ्यास (25 मिनट)
| क्रम | अभ्यास | अवधि | लाभ |
|---|---|---|---|
| 1 | गहरी श्वास | 2 मिनट | मन शांत, शरीर तैयार |
| 2 | मार्जरीआसन | 3 मिनट | रीढ़ लचीली, पीठ आराम |
| 3 | सेतु बंधासन (3-4 बार) | 8 मिनट | पीठ मजबूत, कूल्हे खुले |
| 4 | पवनमुक्तासन | 5 मिनट | पाचन सुधार, गैस राहत |
| 5 | बालासन | 4 मिनट | विश्राम, तनाव कम |
| 6 | शवासन | 3 मिनट | पूर्ण विश्राम |
दिन 18-20 के लिए जरूरी बातें:
- सेतु बंधासन में कूल्हों को धीरे-धीरे उठाएँ
- पवनमुक्तासन में घुटनों को छाती के पास दबाएँ
- साँस छोड़ते हुए पेट को अंदर लाएँ
- थकान हो तो बालासन में आराम करें
- हर दिन थोड़ा सुधार करें
इन तीन दिनों में क्या अनुभव होगा?
✓ सकारात्मक अनुभव
- पीठ में मजबूती
- पाचन में सुधार
- गैस/कब्ज से राहत
- कूल्हों में खिंचाव
- मन में हल्कापन
⚠ सामान्य चुनौतियाँ
- कूल्हों को ऊपर उठाना
- घुटनों को छाती तक लाना
- पीठ में हल्का दर्द
- गर्दन में अकड़न
टिप: सेतु बंधासन में अगर कूल्हों को ऊपर उठाना मुश्किल हो तो कूल्हों के नीचे तकिया रखें। पवनमुक्तासन में एक-एक पैर से शुरू करें।
सावधानियाँ
किन बातों का ध्यान रखें:
- गर्दन में चोट हो तो सेतु बंधासन न करें
- गर्दन को इधर-उधर न घुमाएँ
- घुटनों में तेज दर्द हो तो पवनमुक्तासन न करें
- गर्भावस्था में पेट पर दबाव न डालें
- हाल ही में सर्जरी हुई हो तो डॉक्टर से सलाह लें
- खाली पेट या हल्का भोजन करके अभ्यास करें
- हर्निया, अल्सर या स्लिप डिस्क में सावधानी
आगे क्या?
दिन 18-20 पूरा करने के बाद आप दिन 21 की ओर बढ़ेंगे जहाँ दोहराव और प्रवाह का अभ्यास करेंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
दिन 18-20 की शुरुआत करें
पीठ मजबूत बनाएँ और पाचन सुधारें
आज ही 25 मिनट का यह सरल अभ्यास करें। सेतु बंधासन और पवनमुक्तासन से शरीर को स्वस्थ बनाएँ।
दिन 21 पर जाएँ पूरा प्लान देखें